Breaking

Post Top Ad

Saturday, July 21, 2018

diwali essay|hindi diwali essay|short diwali essay

essay on Diwali in Hindi |diwali essay for students|diwali essay for teachers|diwali essay Hindi language

diwali eassy hindi language


1. दीपावली दीपों का त्यौहार । Essay on Diwali – Festival of Lights in Hindi Language (Hindu Festival)

भारत त्यौहारों का देश है, यहाँ समय-समय पर विभिन्न जातियों समुदायों द्वारा अपने-अपने त्यौहार मनाये जाते हैं सभी त्यौहारों में दीपावली सर्वाधिक प्रिय है । दीपों का त्यौहार दीपावली दीवाली जैसे अनेक नामों से पुकारा जाने वाला आनन्द और प्रकाश का त्यौहार है ।
यह त्यौहार भारतीय सभ्यता-संस्कृति का एक सर्वप्रमुख त्यौहार है । यह ऋतु परिवर्तन का सूचक है । इसके साथ अनेक धार्मिक मान्यताएँ भी जुड़ी हैं यह उत्साह, उल्लास, भाईचारे, साफ-सफाई तथा पूजा-अर्चना का त्यौहार है । यह त्यौहार प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है ।
दीपावली का त्यौहार मनाने की परंपरा कब और क्यों आरंभ हुई कहते हैं: इस दिन अयोध्या के राजा रामचंद्र लंका के अत्याचारी राजा रावण का नाश कर और चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयो ध्या वापस लोटे थे । उनकी विजय और आगमन की खुशी के प्रतीक रूप में अयोध्यावासियों ने नगर को घी के दीपों से प्रकाशित किया था ।
प्रसन्नता के सूचक पटाखे और आतिशबाजी का प्रदर्शन कर परस्पर मिठाईयां बांटी थी । उसी दिन का स्मरण करने तथा अज्ञान-अंधकार एवं अन्याय- अत्याचार के विरूद्ध हमेशा संघर्ष करते रहने की चेतना उजागर किए रहने के लिए ही उस दिन से प्रत्येक वर्ष भारतवासी इस दिन दीप जलाकर हार्दिक हर्षोउल्लास प्रकट करते और मिठाईया खिलाकर अपनी प्रसन्नता का आदान प्रदान करते हैं ।
इस दिन जैन तीर्थकर भगवान महावीर ने जैतन्य की प्राण प्रतिष्ठा करते हुए महानिर्वाण प्राप्त किया था । स्वामी दयानंद ने भी इस दिन निर्वाण प्राप्त किया था । सिख संप्रदाय के छठे गुरू हरगोविंदजी को बंदीग्रह से छोड़ा गया था इसलिए लोगों ने दीपमाला सजाई थी ।
दीपावली आने तक ऋतु के प्रभाव से वर्षा ऋतु प्राय: समाप्त हो चुकी होती है । मौसम में गुलाबी ठंडक घुलने लगती है आकाश पर खजन पक्षियों की पंक्तिबद्ध टोलिया उड़कर उसकी नील नीरवता को चार चाद लगा दिया करती हैं । राजहंस मानसरोवर में लोट आते हैं नदियों-सरोवरों का जल इस समय तक स्वच्छ और निर्मल हो चुका होता है ।
प्रकृति में नया निखार और खुमार आने लगता है । इन सबसे प्रेरणा लेकर लोग-बाग भी अपने-अपने घर साफ बनाकर रंग-रोगन करवाने लगते हैं इस प्रकार प्रकृति उगैर मानव समाज दोनों ही जैसे गंदगी के अंधकार को दूर भगा प्रकाश का पर्व दीपावली मनाने की तैयारी करने लगते हैं यह तैयारी दुकानों-बाजारों की सजावट और रौनक दिखाई देने लगती है ।
दीपावली को धूम-धाम से मनाने के लिए हफ्तों पहले तैयारी आरंभ हो जाती है । पांच-छ: दिन पहले फल-मेवों और मिठाइयों की दुकाने सज-धज कर खरीददारों का आकर्षण बन जाती है । मिट्टी के खिलौने दीपक अन्य प्रकार की मूर्तियाँ चित्र बनाने वाले बाजारों में आ जाते हैं ।
पटाखे, आतिशबाजी के स्टालों पर खरीददारों की भीड़ लग जाती है । खील, बताशे खिलौने मिठाईयां बनाई व खरीदी जाती हैं इन्हें बेचने के लिए बाजारों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है । दीपावली की रात दीपकों और बिजली के छोटे-बड़े बच्चों से घरों-दुकानों का वातावरण पूरी तरह से जगमगा उठता है ।
दीपावली के लिए नए-नए कपड़े सिलाए जाते हैं मिठाई पकवान बनते हैं घर-घर में लक्ष्मी का पूजन शुभ कामनाओं का आदान-प्रदान और मुंह मीठा किया कराया जाता है । व्यापारी लक्ष्मी पूजन के साथ नए बही खाते आरम्भ करते हैं इस प्रकार दीपावली प्रसन्नता और प्रकाश का त्यौहार है । जुआ खेलना, शराब पीना जैसी कुछ कुरीतियाँ भी स्वार्थी लोगों ने इस पवित्र त्यौहार के साथ  जोड़ रखी हैं उनमें होने वाले दीवाले से सजग सावधान ही त्यौहार को आनंदपूर्ण बना सकते हैं ।

essay on Diwali in Hindi |diwali essay for students|

दिवाली निबंध :

दिवाली को रोशनी का त्योहार के रुप में जाना जाता है जो भरोसा और उन्नति लेकर आता है। हिन्दू, सिक्ख और जैन धर्म के लोगों के लिये इसके कई सारे प्रभाव और महत्ता है। ये पाँच दिनों का उत्सव है जो हर साल दशहरा के 21 दिनों बाद आता है। इसके पीछे कई सारी सांस्कृतिक आस्था है जो भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अपने राज्य के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन अयोध्यावासीयों ने भगवान राम के आने पर आतिशबाजी और रोशनी से उनका स्वागत किया।
दिपावली के दौरान लोग अपने घर और कार्यस्थली की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई करते है। आमजन की ऐसी मान्यता है कि हर तरफ रोशनी और खुले खिड़की दरवाजों से देवी लक्ष्मी उनके लिये ढ़ेर सारा आशीर्वाद, सुख, संपत्ति और यश लेकर आएंगी। इस त्योहार में लोग अपने घरों को सजाने के साथ रंगोली से अपने प्रियजनों का स्वागत करते है। नये कपड़ों, खुशबुदार पकवानों, मिठाईयों और पटाखों से पाँच दिन का ये उत्सव और चमकदार हो जाता है।
दिपावली के पहले दिन को धनतेरस या धनत्रेयोंदशीं कहते है जिसे माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है। इसमें लोग देवी को खुश करने के लिये भक्ति गीत, आरती और मंत्र उच्चारण करते है। दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या छोटी दिपावली कहते है जिसमें भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। ऐसी धार्मिक धारणा है कि सुबह जल्दी तेल से स्नान कर देवी काली की पूजा करते है और उन्हें कुमकुम लगाते है।
तीसरा दिन मुख्य दिपावली का होता है जिसमें माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, अपने मित्रों और परिवारजन में मिठाई और उपहार बाँटे जाते है साथ ही शाम को जमके आतिशबाजी की जाती है।
चौथा दिन गोवर्धन पूजा के लिये होता है जिसमें भगवान कृष्ण की अराधना की जाती है। लोग गायों के गोबर से अपनी दहलीज पर गोवर्धन बनाकर पूजा करते है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अचानक आयी वर्षा से गोकुल के लोगों को बारिश के देवता इन्द्र से बचाया था। पाँचवें दिन को हमलोग यामा द्वीतिय या भैया दूज के नाम से जानते है। ये भाई-बहनों का त्योहार होता है।

1 comment:

Post Top Ad

Your Ad Spot